
चिंता की मां मर चुकी थी। बाप को शराब की लत थी। बाप ने जैसे-तैसे शादी कर दी। चिंता का पति भी शराबी निकला। नशे में कहीं लुढ़का पड़ा रहता। अंधेरा होते ही चिंता उसे खोजने निकलती। धूल-माटी से सने पति को किसी तरह घर लाती है। चिंता ने जो बचपन में खुद झेला था, अब उसके बच्चे झेल रहे थे। सारण जिले के मकेर की चिंता की जिंदगी जहमत बन गई थी। शराबबंदी से पति की पीने की लत ही नहीं छूटी चिंता को जीने की हिम्मत भी मिली।
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